Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.93.14: दूसरों के कल्याण के लिए ऐसा प्रयत्न करने पर भी यदि दुर्योधन मुझ पर संदेह करे, तो भी मेरा मन प्रसन्न रहेगा और मैं अपने कर्तव्य के भार से मुक्त हो जाऊँगा ॥14॥ | mahabharat अध्याय 5.93: श्रीकृष्णका कौरव-पाण्डवोंमें संधिस्थापनके प्रयत्नका औचित्य बताना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हिते प्रयतमानं मां शङ्केद् दुर्योधनो यदि।
हृदयस्य च मे प्रीतिरानृण्यं च भविष्यति॥ १४॥
अनुवाद
दूसरों के कल्याण के लिए ऐसा प्रयत्न करने पर भी यदि दुर्योधन मुझ पर संदेह करे, तो भी मेरा मन प्रसन्न रहेगा और मैं अपने कर्तव्य के भार से मुक्त हो जाऊँगा ॥14॥
Even if Duryodhan doubts me after making such efforts to achieve the welfare of others, my mind will still be happy and I will be relieved of the burden of my duty. ॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥