Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.93.13: मैं धृतराष्ट्र के पुत्रों, पाण्डवों तथा संसार के समस्त क्षत्रियों के कल्याण के लिए निष्कपट भाव से प्रयत्न करूँगा ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 5.93: श्रीकृष्णका कौरव-पाण्डवोंमें संधिस्थापनके प्रयत्नका औचित्य बताना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 93: श्रीकृष्णका कौरव-पाण्डवोंमें संधिस्थापनके प्रयत्नका औचित्य बताना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.93.13 
हितं हि धार्तराष्ट्राणां पाण्डवानां तथैव च।
पृथिव्यां क्षत्रियाणां च यतिष्येऽहममायया॥ १३॥
 
 
अनुवाद
मैं धृतराष्ट्र के पुत्रों, पाण्डवों तथा संसार के समस्त क्षत्रियों के कल्याण के लिए निष्कपट भाव से प्रयत्न करूँगा ॥13॥
 
I will sincerely strive for the welfare of Dhritarashtra's sons, Pandavas and all the Kshatriyas of the world. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)