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mahabharat 5.92.9: मधुसूदन! मूर्ख और बुद्धिहीन दुर्योधन राजाओं की सेना एकत्रित करके अपने को कृतार्थ मानता है।   |   mahabharat अध्याय 5.92: विदुरजीका धृतराष्ट्रपुत्रोंकी दुर्भावना बताकर श्रीकृष्णको उनके कौरवसभामें जानेका अनौचित्य बतलाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.92.9 
सेनासमुदयं कृत्वा पार्थिवं मधुसूदन।
कृतार्थं मन्यते बाल आत्मानमविचक्षण:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! मूर्ख और बुद्धिहीन दुर्योधन राजाओं की सेना एकत्रित करके अपने को कृतार्थ मानता है।
 
Madhusudana! The foolish and wisdomless Duryodhan considers himself accomplished after gathering the army of kings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)