Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.92.7: वह भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, कर्ण, अश्वत्थामा और जयद्रथ पर अधिक भरोसा करता है; अत: उसके मन में संधि करने का विचार भी नहीं आता।॥ 7॥ | mahabharat अध्याय 5.92: विदुरजीका धृतराष्ट्रपुत्रोंकी दुर्भावना बताकर श्रीकृष्णको उनके कौरवसभामें जानेका अनौचित्य बतलाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, कर्ण, अश्वत्थामा और जयद्रथ पर अधिक भरोसा करता है; अत: उसके मन में संधि करने का विचार भी नहीं आता।॥ 7॥
‘He trusts Bhishma, Dronacharya, Kripacharya, Karna, Ashwatthama and Jayadratha more; therefore, he does not even have the thought of entering into a treaty.॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥