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mahabharat 5.92.30: ‘कमल-नयन! आपको देखकर मुझमें जो प्रेम उमड़ा है, उसका वर्णन मैं आपसे कैसे करूँ? आप समस्त देहधारियों के अन्तर्यामी हैं (अतः आप स्वयं ही सब कुछ देखते और जानते हैं)’।   |   mahabharat अध्याय 5.92: विदुरजीका धृतराष्ट्रपुत्रोंकी दुर्भावना बताकर श्रीकृष्णको उनके कौरवसभामें जानेका अनौचित्य बतलाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 92: विदुरजीका धृतराष्ट्रपुत्रोंकी दुर्भावना बताकर श्रीकृष्णको उनके कौरवसभामें जानेका अनौचित्य बतलाना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.92.30 
या मे प्रीति: पुष्कराक्ष त्वद्दर्शनसमुद्भवा।
सा किमाख्यायते तुभ्यमन्तरात्मासि देहिनाम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
‘कमल-नयन! आपको देखकर मुझमें जो प्रेम उमड़ा है, उसका वर्णन मैं आपसे कैसे करूँ? आप समस्त देहधारियों के अन्तर्यामी हैं (अतः आप स्वयं ही सब कुछ देखते और जानते हैं)’।
 
‘Lotus-eyed! How can I describe to you the love that has overflowed for me by seeing you? You are the inner soul of all embodied beings (therefore you see and know everything yourself)’.
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि श्रीकृष्णविदुरसंवादे द्विनवतितमोऽध्याय:॥ ९२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें श्रीकृष्ण-विदुरसंवादविषयक बानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)