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mahabharat 5.92.22: रथियों और घुड़सवारों सहित हाथियों की सेना के बीच में खड़ा हुआ मंदबुद्धि और मूर्ख दुर्योधन किसी भी प्रकार का भय न रखते हुए यह सोचता है कि उसने सम्पूर्ण पृथ्वी को जीत लिया है।   |   mahabharat अध्याय 5.92: विदुरजीका धृतराष्ट्रपुत्रोंकी दुर्भावना बताकर श्रीकृष्णको उनके कौरवसभामें जानेका अनौचित्य बतलाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 92: विदुरजीका धृतराष्ट्रपुत्रोंकी दुर्भावना बताकर श्रीकृष्णको उनके कौरवसभामें जानेका अनौचित्य बतलाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.92.22 
मध्ये तिष्ठन् हस्त्यनीकस्य मन्दो
रथाश्वयुक्तस्य बलस्य मूढ:।
दुर्योधनो मन्यते वीतभीति:
कृत्स्ना मयेयं पृथिवी जितेति॥ २२॥
 
 
अनुवाद
रथियों और घुड़सवारों सहित हाथियों की सेना के बीच में खड़ा हुआ मंदबुद्धि और मूर्ख दुर्योधन किसी भी प्रकार का भय न रखते हुए यह सोचता है कि उसने सम्पूर्ण पृथ्वी को जीत लिया है।
 
Standing in the midst of an army of elephants along with charioteers and horsemen, the dull-witted and foolish Duryodhana, devoid of any fear, thinks that he has conquered the entire earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)