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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 92: विदुरजीका धृतराष्ट्रपुत्रोंकी दुर्भावना बताकर श्रीकृष्णको उनके कौरवसभामें जानेका अनौचित्य बतलाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.92.21 
तेष्वेवमुपपन्नेषु कामक्रोधानुवर्तिषु।
समर्थमपि ते वाक्यमसमर्थं भविष्यति॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जो लोग इस प्रकार मन बनाकर केवल काम और क्रोध का अनुसरण कर रहे हैं, उनके लिए आपके तर्कपूर्ण और अर्थपूर्ण वचन व्यर्थ और असफल होंगे॥ 21॥
 
Your logical and meaningful words will be futile and unsuccessful for those who have made up their minds in this manner and are only following lust and anger.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)