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mahabharat 5.92.15: मूर्ख दुर्योधन सेना एकत्रित करके अपने को शक्तिशाली समझता है। वह आपकी बात नहीं मानेगा। आप जो भी उससे कहेंगे, वह व्यर्थ होगा।॥15॥   |   mahabharat अध्याय 5.92: विदुरजीका धृतराष्ट्रपुत्रोंकी दुर्भावना बताकर श्रीकृष्णको उनके कौरवसभामें जानेका अनौचित्य बतलाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 92: विदुरजीका धृतराष्ट्रपुत्रोंकी दुर्भावना बताकर श्रीकृष्णको उनके कौरवसभामें जानेका अनौचित्य बतलाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.92.15 
सोऽयं बलस्थो मूढश्च न करिष्यति ते वच:।
तस्मिन् निरर्थकं वाक्यमुक्तं सम्पत्स्यते तव॥ १५॥
 
 
अनुवाद
मूर्ख दुर्योधन सेना एकत्रित करके अपने को शक्तिशाली समझता है। वह आपकी बात नहीं मानेगा। आप जो भी उससे कहेंगे, वह व्यर्थ होगा।॥15॥
 
‘The foolish Duryodhan thinks himself powerful by gathering an army. He will not listen to you. Every word you say to him will be meaningless.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)