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mahabharat 5.92.13: मधुसूदन! जहाँ अच्छे और बुरे कर्मों का फल एक ही हो, वहाँ विद्वान पुरुष को कुछ नहीं कहना चाहिए। वहाँ कुछ भी कहना बहरे के सामने गीत गाने के समान व्यर्थ है॥13॥   |   mahabharat अध्याय 5.92: विदुरजीका धृतराष्ट्रपुत्रोंकी दुर्भावना बताकर श्रीकृष्णको उनके कौरवसभामें जानेका अनौचित्य बतलाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 92: विदुरजीका धृतराष्ट्रपुत्रोंकी दुर्भावना बताकर श्रीकृष्णको उनके कौरवसभामें जानेका अनौचित्य बतलाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.92.13 
यत्र सूक्तं दुरुक्तं च समं स्यान्मधुसूदन।
न तत्र प्रलपेत् प्राज्ञो बधिरेष्विव गायन:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! जहाँ अच्छे और बुरे कर्मों का फल एक ही हो, वहाँ विद्वान पुरुष को कुछ नहीं कहना चाहिए। वहाँ कुछ भी कहना बहरे के सामने गीत गाने के समान व्यर्थ है॥13॥
 
‘Madhusudana! Where the results of good and bad things are the same, a learned person should not say anything. Saying anything there is as futile as singing a song in front of the deaf.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)