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mahabharat 5.92.11-12: केशव! धृतराष्ट्र के सभी पुत्रों ने यह निश्चय कर लिया है कि हमें पाण्डवों को उनका उचित राज्य नहीं देना चाहिए। यह उनका दृढ़ निश्चय है। आप यहाँ संधि के लिए प्रयत्न कर रहे हैं और उनमें भ्रातृत्व की अच्छी भावना जागृत करना चाहते हैं; किन्तु आप उन दुष्टों से जो कुछ कहेंगे, वह व्यर्थ होगा। 11-12.   |   mahabharat अध्याय 5.92: विदुरजीका धृतराष्ट्रपुत्रोंकी दुर्भावना बताकर श्रीकृष्णको उनके कौरवसभामें जानेका अनौचित्य बतलाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.92.11-12 
संविच्च धार्तराष्ट्राणां सर्वेषामेव केशव।
शमे प्रयतमानस्य तव सौभ्रात्रकाङ्क्षिण:॥ ११॥
न पाण्डवानामस्माभि: प्रतिदेयं यथोचितम्।
इति व्यवसितास्तेषु वचनं स्यान्निरर्थकम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
केशव! धृतराष्ट्र के सभी पुत्रों ने यह निश्चय कर लिया है कि हमें पाण्डवों को उनका उचित राज्य नहीं देना चाहिए। यह उनका दृढ़ निश्चय है। आप यहाँ संधि के लिए प्रयत्न कर रहे हैं और उनमें भ्रातृत्व की अच्छी भावना जागृत करना चाहते हैं; किन्तु आप उन दुष्टों से जो कुछ कहेंगे, वह व्यर्थ होगा। 11-12.
 
Keshava! All the sons of Dhritarashtra have decided that we should not give the Pandavas their rightful share of the kingdom. This is their firm resolve. Here you are trying for a treaty and want to awaken the good feeling of brotherhood among them; but whatever you say to those wicked people will be in vain. 11-12.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)