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mahabharat 5.92.10: दुष्टबुद्धि दुर्योधन को यह विश्वास हो गया है कि कर्ण ही शत्रुओं को परास्त करने में समर्थ है; इसलिए वह कभी संधि नहीं करेगा॥10॥   |   mahabharat अध्याय 5.92: विदुरजीका धृतराष्ट्रपुत्रोंकी दुर्भावना बताकर श्रीकृष्णको उनके कौरवसभामें जानेका अनौचित्य बतलाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 92: विदुरजीका धृतराष्ट्रपुत्रोंकी दुर्भावना बताकर श्रीकृष्णको उनके कौरवसभामें जानेका अनौचित्य बतलाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.92.10 
एक: कर्ण: पराञ्जेतुं समर्थ इति निश्चितम्।
धार्तराष्ट्रस्य दुर्बुद्धे: स शमं नोपयास्यति॥ १०॥
 
 
अनुवाद
दुष्टबुद्धि दुर्योधन को यह विश्वास हो गया है कि कर्ण ही शत्रुओं को परास्त करने में समर्थ है; इसलिए वह कभी संधि नहीं करेगा॥10॥
 
The evil-minded Duryodhan is convinced that Karna alone is capable of defeating the enemies; therefore he will never enter into a treaty.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)