श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  5.91.d1 
(द्विषदन्नं न भोक्तव्यं द्विषन्तं नैव भोजयेत्।
पाण्डवान् द्विषसे राजन् मम प्राणा हि पाण्डवा:॥ )
 
 
अनुवाद
जो शत्रुता रखता हो, उसका अन्न नहीं खाना चाहिए। शत्रुता रखने वाले को भोजन भी नहीं देना चाहिए। राजन! आप पाण्डवों से शत्रुता रखते हैं और पाण्डव ही मेरे प्राण हैं।'
 
‘One should not eat the food of someone who bears enmity. One should not even feed a person who bears enmity. King! You have enmity towards the Pandavas and the Pandavas are my life.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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