श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.91.41 
ततोऽनुयायिभि: सार्धं मरुद्भिरिव वासव:।
विदुरान्नानि बुभुजे शुचीनि गुणवन्ति च॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् देवताओं तथा इन्द्र आदि अनुचरों के साथ भगवान श्रीकृष्ण ने विदुरजी के पवित्र एवं हितकारी अन्न-पेय का सेवन किया॥41॥
 
Thereafter, Lord Shri Krishna along with the deities and his followers, like Indra, consumed the sacred and beneficial food and drinks of Vidurji. 41॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि श्रीकृष्णदुर्योधनसंवादे एकनवतितमोऽध्याय:॥ ९१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें श्रीकृष्ण-दुर्योधन-संवादविषयक इक्यानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९१॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ४२ श्लोक हैं।]
 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas