श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.91.40 
तैस्तर्पयित्वा प्रथमं ब्राह्मणान् मघुसूदन:।
वेदविद्भॺो ददौ कृष्ण: परमद्रविणान्यपि॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन ने पहले ब्राह्मणों को उस भोजन और पेय से तृप्त किया, फिर वेदवेत्ताओं को भी उत्तम धन दिया।
 
Madhusudana first satisfied the brahmins with that food and drink, and then he also gave the best of wealth to those scholars of the Vedas. 40.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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