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श्लोक 5.91.39  |
तत: क्षत्तान्नपानानि शुचीनि गुणवन्ति च।
उपाहरदनेकानि केशवाय महात्मने॥ ३९॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् उन्होंने महात्मा केशव को अनेक प्रकार के पवित्र एवं लाभकारी खाद्य पदार्थ अर्पित किये। |
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| Thereafter, he offered various types of sacred and beneficial food items to Mahatma Keshav. |
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