| श्री महाभारत » पर्व 5: उद्योग पर्व » अध्याय 91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना » श्लोक 35-36 |
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| | | | श्लोक 5.91.35-36  | तमभ्यगच्छद् द्रोणश्च कृपो भीष्मोऽथ बाह्लिक:।
कुरवश्च महाबाहुं विदुरस्य गृहे स्थितम्॥ ३५॥
त ऊचुर्माधवं वीरं कुरवो मधुसूदनम्।
निवेदयामो वार्ष्णेय सरत्नांस्ते गृहान् वयम्॥ ३६॥ | | | | | | अनुवाद | | उस समय द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, भीष्म, बाह्लीक आदि कौरव भी महाबाहु श्रीकृष्ण के पीछे-पीछे चले। उन सभी कौरवों ने विदुर के घर निवास कर रहे यदुवंशी वीर मधुसूदन से कहा - 'वृष्णिनन्दन! हम रत्नों और धन से परिपूर्ण अपने घर आपकी सेवा में प्रस्तुत करते हैं।' | | | | At that time, Dronacharya, Krupacharya, Bhishma, Bahlika and other Kauravas also followed the mighty-armed Sri Krishna. All those Kauravas said to the brave Madhusudan of the Yadu dynasty who was staying at Vidur's house - 'Vrishninandan! We offer our houses full of gems and wealth to your service.' | | ✨ ai-generated | | |
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