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mahabharat 5.91.32: ‘आपका यह सब अन्न द्वेष से दूषित है। अतः यह मेरे खाने योग्य नहीं है। मेरे लिए तो यहाँ केवल विदुर का अन्न ही खाने योग्य है। ऐसा मेरा दृढ़ विश्वास है।’॥32॥   |   mahabharat अध्याय 5.91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.91.32 
सर्वमेतन्न भोक्तव्यमन्नं दुष्टाभिसंहितम्।
क्षत्तुरेकस्य भोक्तव्यमिति मे धीयते मति:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
‘आपका यह सब अन्न द्वेष से दूषित है। अतः यह मेरे खाने योग्य नहीं है। मेरे लिए तो यहाँ केवल विदुर का अन्न ही खाने योग्य है। ऐसा मेरा दृढ़ विश्वास है।’॥32॥
 
‘All this food of yours is contaminated with ill-will. Hence it is not fit for me to eat. For me, only Vidur's food is fit for eating here. This is my firm belief.'॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)