Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.91.3-4h: द्वारपालों ने फिर भी नहीं रोका। उस राजमहल के तीनों द्वार पार करके तेजस्वी श्रीकृष्ण एक ऐसे महल पर विराजमान हुए जो आकाश में शरद ऋतु के मेघों के समान श्वेत, पर्वत शिखर के समान ऊँचा और उसकी अद्भुत ज्योति से प्रकाशित था। 3 1/2॥ | mahabharat अध्याय 5.91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्वारपालों ने फिर भी नहीं रोका। उस राजमहल के तीनों द्वार पार करके तेजस्वी श्रीकृष्ण एक ऐसे महल पर विराजमान हुए जो आकाश में शरद ऋतु के मेघों के समान श्वेत, पर्वत शिखर के समान ऊँचा और उसकी अद्भुत ज्योति से प्रकाशित था। 3 1/2॥
The gatekeepers did not stop. After crossing the three doors of that royal palace, the glorious Shri Krishna sat on a palace which was as white as the autumn clouds in the sky, as high as a mountain peak and illuminated with its amazing light. 3 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥