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mahabharat 5.91.29: जो काम और क्रोध के वशीभूत होकर आसक्ति के कारण पुण्यात्मा पुरुष का विरोध करना चाहता है, वह मनुष्यों में नीच कहा गया है॥29॥   |   mahabharat अध्याय 5.91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.91.29 
कामक्रोधानुवर्ती हि यो मोहाद् विरुरुत्सति।
गुणवन्तं च यो द्वेष्टि तमाहु: पुरुषाधमम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जो काम और क्रोध के वशीभूत होकर आसक्ति के कारण पुण्यात्मा पुरुष का विरोध करना चाहता है, वह मनुष्यों में नीच कहा गया है॥29॥
 
He who, under the influence of lust and anger, out of attachment wants to oppose a virtuous person is said to be the lowest of men.॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)