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श्लोक 5.91.29  |
कामक्रोधानुवर्ती हि यो मोहाद् विरुरुत्सति।
गुणवन्तं च यो द्वेष्टि तमाहु: पुरुषाधमम्॥ २९॥ |
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| अनुवाद |
| जो काम और क्रोध के वशीभूत होकर आसक्ति के कारण पुण्यात्मा पुरुष का विरोध करना चाहता है, वह मनुष्यों में नीच कहा गया है॥29॥ |
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| He who, under the influence of lust and anger, out of attachment wants to oppose a virtuous person is said to be the lowest of men.॥ 29॥ |
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