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mahabharat 5.91.26: हे राजन! पांडव आपके भाई हैं। वे अपने प्रेमियों के प्रति निष्ठावान हैं और सभी सद्गुणों से संपन्न हैं। किन्तु आप उनसे जन्म से ही अकारण द्वेष करते आ रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.91.26 
अकस्माद् द्वेष्टि वै राजन् जन्मप्रभृति पाण्डवान्।
प्रियानुवर्तिनो भ्रातॄन् सर्वै: समुदितान् गुणै:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! पांडव आपके भाई हैं। वे अपने प्रेमियों के प्रति निष्ठावान हैं और सभी सद्गुणों से संपन्न हैं। किन्तु आप उनसे जन्म से ही अकारण द्वेष करते आ रहे हैं।
 
O King! The Pandavas are your brothers. They are loyal to their lovers and are endowed with all good qualities. But you have been hating them since birth without any reason.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)