Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.91.25: किसी के घर का भोजन या तो प्रेम से खाया जाता है या फिर विपत्ति में। हे मनुष्यों के स्वामी! आप दूसरों से प्रेम नहीं करते और हम किसी विपत्ति में नहीं हैं॥ 25॥ | mahabharat अध्याय 5.91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सम्प्रीतिभोज्यान्यन्नानि आपद्भोज्यानि वा पुन:।
न च सम्प्रीयसे राजन् न चैवापद्गता वयम्॥ २५॥
अनुवाद
किसी के घर का भोजन या तो प्रेम से खाया जाता है या फिर विपत्ति में। हे मनुष्यों के स्वामी! आप दूसरों से प्रेम नहीं करते और हम किसी विपत्ति में नहीं हैं॥ 25॥
‘Food at someone's house is either eaten out of love or when one is in trouble. O Lord of men! You do not love others and we are not in any trouble.॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥