श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.91.24 
नाहं कामान्न संरम्भान्न द्वेषान्नार्थकारणात्।
न हेतुवादाल्लोभाद् वा धर्मं जह्यां कथंचन॥ २४॥
 
 
अनुवाद
राजन! मैं काम, क्रोध, द्वेष, स्वार्थ, बहानेबाजी अथवा लोभ के कारण भी धर्म का परित्याग नहीं कर सकता॥ 24॥
 
King! I cannot abandon Dharma out of lust, anger, hatred, selfishness, making excuses or even out of greed.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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