श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.91.23 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त: प्रत्युवाच धार्तराष्ट्रं जनार्दन:।
अभिवीक्ष्य सहामात्यं दाशार्ह: प्रहसन्निव॥ २३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! यह सुनकर दशार्हवंशी रत्न जनार्दन ने मंत्रियों सहित दुर्योधन की ओर देखकर मुस्कुराकर उत्तर दिया।
 
Vaishmpayana says - O King! On hearing this, Janardan, the jewel of the Dasarha clan, looked at Duryodhan along with his ministers and replied smilingly.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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