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श्लोक 5.91.22  |
वैरं नो नास्ति भवता गोविन्द न च विग्रह:।
स भवान् प्रसमीक्ष्यैतन्नेदृशं वक्तुमर्हति॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| ‘गोविन्द! हमारा आपसे न तो कोई बैर है, न कोई झगड़ा। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए आपको ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए।’॥22॥ |
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| ‘Govind! We have neither any enmity nor any quarrel with you. Considering all these things, you should not say such a thing.’॥ 22॥ |
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