श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.91.22 
वैरं नो नास्ति भवता गोविन्द न च विग्रह:।
स भवान् प्रसमीक्ष्यैतन्नेदृशं वक्तुमर्हति॥ २२॥
 
 
अनुवाद
‘गोविन्द! हमारा आपसे न तो कोई बैर है, न कोई झगड़ा। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए आपको ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए।’॥22॥
 
‘Govind! We have neither any enmity nor any quarrel with you. Considering all these things, you should not say such a thing.’॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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