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mahabharat 5.91.20: दशरहनन्दन मधुसूदन! आपका उद्देश्य सफल हो या न हो, हम आपका सम्मान करने का प्रयत्न कर रहे हैं; किन्तु हमें सफलता नहीं मिल रही है॥ 20॥   |   mahabharat अध्याय 5.91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.91.20 
कृतार्थं वाकृतार्थं च त्वां वयं मधुसूदन।
यतामहे पूजयितुं दाशार्ह न च शक्नुम:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
दशरहनन्दन मधुसूदन! आपका उद्देश्य सफल हो या न हो, हम आपका सम्मान करने का प्रयत्न कर रहे हैं; किन्तु हमें सफलता नहीं मिल रही है॥ 20॥
 
Dashaarhanandan Madhusudan! Whether your objective is successful or not, we are trying to honour you; but we are not getting success.॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)