श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.91.18 
कृतार्था भुञ्जते दूता: पूजां गृह्णन्ति चैव ह।
कृतार्थं मां सहामात्यं समर्चिष्यसि भारत॥ १८॥
 
 
अनुवाद
भरत! यह नियम है कि दूत अपना उद्देश्य पूरा होने पर ही भोजन और आदर ग्रहण करते हैं। तुम भी मेरा और मेरे मंत्रियों का आदर मेरे उद्देश्य पूरा होने पर ही करना।॥18॥
 
Bharat! It is a rule that messengers accept food and respect only after their purpose is accomplished. You too should honor me and my ministers only after my purpose is accomplished.'॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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