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mahabharat 5.91.14-15: आपने दोनों पक्षों की सहायता की है, आप दोनों पक्षों की सहायता करने के लिए तत्पर हैं। माधव! आप महाराज धृतराष्ट्र के प्रिय सम्बन्धी भी हैं। हे चक्र और गदा धारण करने वाले गोविन्द! आपको धर्म और अर्थ का पूर्ण और सच्चा ज्ञान है; फिर मेरा आतिथ्य स्वीकार न करने का क्या कारण है; यह मैं सुनना चाहता हूँ॥ 14-15॥   |   mahabharat अध्याय 5.91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  5.91.14-15 
उभयोश्चाददा: साह्यमुभयोश्च हिते रत:॥ १४॥
सम्बन्धी दयितश्चासि धृतराष्ट्रस्य माधव।
त्वं हि गोविन्द धर्मार्थौ वेत्थ तत्त्वेन सर्वश:।
तत्र कारणमिच्छामि श्रोतुं चक्रगदाधर॥ १५॥
 
 
अनुवाद
आपने दोनों पक्षों की सहायता की है, आप दोनों पक्षों की सहायता करने के लिए तत्पर हैं। माधव! आप महाराज धृतराष्ट्र के प्रिय सम्बन्धी भी हैं। हे चक्र और गदा धारण करने वाले गोविन्द! आपको धर्म और अर्थ का पूर्ण और सच्चा ज्ञान है; फिर मेरा आतिथ्य स्वीकार न करने का क्या कारण है; यह मैं सुनना चाहता हूँ॥ 14-15॥
 
You have helped both the parties, you are ready to help both the parties. Madhava! You are also a dear relative of Maharaja Dhritarashtra. Govinda, the one who holds the discus and the mace! You have the complete and true knowledge of Dharma and Artha; then what is the reason for not accepting my hospitality; I want to hear this.॥ 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)