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mahabharat 5.91.13-14h: (दुर्योधन ने कहा -) जनार्दन! जो अन्न, जल, वस्त्र और शय्या आदि तुम्हें दिए गए थे, उन्हें तुमने क्यों स्वीकार नहीं किया?॥13 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  5.91.13-14h 
कस्मादन्नानि पानानि वासांसि शयनानि च॥ १३॥
त्वदर्थमुपनीतानि नाग्रहीस्त्वं जनार्दन।
 
 
अनुवाद
(दुर्योधन ने कहा -) जनार्दन! जो अन्न, जल, वस्त्र और शय्या आदि तुम्हें दिए गए थे, उन्हें तुमने क्यों स्वीकार नहीं किया?॥13 1/2॥
 
(Duryodhan said -) Janardan! Why did you not accept the food, water, clothes and bed etc. that were offered to you?॥ 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)