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mahabharat 5.90.d1-d2h: हे वृष्णिनन्दन माधव, जिन्हें कोई पराजित नहीं कर सकता! आप कौरवों, पाण्डवों तथा सम्पूर्ण जगत के आश्रय हैं। केशव! आपका प्रभाव और आपकी बुद्धि शक्ति भी आपके अनुरूप ही है।   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक d1-d2h
 
 
श्लोक  5.90.d1-d2h 
(कुरूणां पाण्डवानां च लोकानां चापराजित।
सर्वस्यैतस्य वार्ष्णेय गतिस्त्वमसि माधव॥
प्रभावो बुद्धिवीर्यं च तादृशं तव केशव।)
 
 
अनुवाद
हे वृष्णिनन्दन माधव, जिन्हें कोई पराजित नहीं कर सकता! आप कौरवों, पाण्डवों तथा सम्पूर्ण जगत के आश्रय हैं। केशव! आपका प्रभाव और आपकी बुद्धि शक्ति भी आपके अनुरूप ही है।
 
Vrishninandan Madhav, who cannot be defeated by anyone! You are the refuge of the Kauravas, the Pandavas and the entire world. Keshav! Your influence and your intellectual power are also in accordance with you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)