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mahabharat 5.90.96-97: धैर्यवान पुरुष सुखों की अंतिम अवस्था का ही आनंद लेते हैं। जो पुरुष ग्राम्य सुखों में लीन रहते हैं, वे सुखों की मध्य अवस्था का ही आनंद लेते हैं। वे धैर्यवान पुरुष अपने कर्तव्य पालन के रूप में प्राप्त होने वाले बड़े-बड़े कष्टों को भी प्रसन्नतापूर्वक सहन करते हैं और अंत में मानवीय सीमाओं से परे सुखों का आनंद लेते हैं। महापुरुष कहते हैं कि अंतिम अवस्था (सुख-दुःख से परे) की प्राप्ति ही वास्तविक सुख है और सुख-दुःख के बीच की अवस्था ही दुःख है।॥96-97॥   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 96-97
 
 
श्लोक  5.90.96-97 
अन्तं धीरा निषेवन्ते मध्यं ग्राम्यसुखप्रिया:।
उत्तमांश्च परिक्लेशान् भोगांश्चातीव मानुषान्॥ ९६॥
अन्तेषु रेमिरे धीरा न ते मध्येषु रेमिरे।
अन्तप्राप्तिं सुखं प्राहुर्दु:खमन्तरमेतयो:॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
धैर्यवान पुरुष सुखों की अंतिम अवस्था का ही आनंद लेते हैं। जो पुरुष ग्राम्य सुखों में लीन रहते हैं, वे सुखों की मध्य अवस्था का ही आनंद लेते हैं। वे धैर्यवान पुरुष अपने कर्तव्य पालन के रूप में प्राप्त होने वाले बड़े-बड़े कष्टों को भी प्रसन्नतापूर्वक सहन करते हैं और अंत में मानवीय सीमाओं से परे सुखों का आनंद लेते हैं। महापुरुष कहते हैं कि अंतिम अवस्था (सुख-दुःख से परे) की प्राप्ति ही वास्तविक सुख है और सुख-दुःख के बीच की अवस्था ही दुःख है।॥96-97॥
 
Patient men enjoy the final stage of pleasures. Men who are engrossed in rural pleasures enjoy only the middle stage of pleasures. Those patient men happily endure the biggest pains received in the form of performing their duties and in the end enjoy the pleasures beyond human limits. Great men say that attainment of the final stage (beyond happiness and pain) is the real happiness and the stage between happiness and pain is pain.॥96-97॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)