Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.90.95: आपके पुत्रों ने ग्राम्य सुखों का त्याग कर दिया है; वे सदैव वीर सुखों में ही रुचि रखते हैं। वे बड़े उत्साही और बलवान हैं; इसलिए वे थोड़े से धन से संतुष्ट नहीं हो सकते॥ 95॥ | mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्यक्तग्राम्यसुखा: पार्था नित्यं वीरसुखप्रिया:।
न तु स्वल्पेन तुष्येयुर्महोत्साहा महाबला:॥ ९५॥
अनुवाद
आपके पुत्रों ने ग्राम्य सुखों का त्याग कर दिया है; वे सदैव वीर सुखों में ही रुचि रखते हैं। वे बड़े उत्साही और बलवान हैं; इसलिए वे थोड़े से धन से संतुष्ट नहीं हो सकते॥ 95॥
Your sons have renounced village pleasures; they always love heroic pleasures. They are very enthusiastic and very powerful; hence they cannot be satisfied with a little wealth.॥ 95॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥