Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.90.94: आपके सभी पुत्र निद्रा, तंद्रा, क्रोध, हर्ष, भूख, प्यास, शीत और उष्णता को जीतकर सदैव वीर सुख का उपभोग करते हैं ॥ 94॥   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  5.90.94 
निद्रातन्द्रे क्रोधहर्षौ क्षुत्पिपासे हिमातपौ।
एतानि पार्था निर्जित्य नित्यं वीरसुखे रता:॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
आपके सभी पुत्र निद्रा, तंद्रा, क्रोध, हर्ष, भूख, प्यास, शीत और उष्णता को जीतकर सदैव वीर सुख का उपभोग करते हैं ॥ 94॥
 
All your sons, having conquered sleep, drowsiness, anger, joy, hunger, thirst, cold and heat, always enjoy heroic happiness. ॥ 94॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)