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mahabharat 5.90.91: भगवान वसुदेव बोले - "बुआ! संसार में तुम्हारे समान सौभाग्यशाली और कौन है? तुम राजा शूरसेन की पुत्री हो और राजा अजमीढ़ के कुल में ब्याही गई हो।"   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  5.90.91 
वासुदेव उवाच
का तु सीमन्तिनी त्वादृक् लोकेष्वस्ति पितृष्वस:।
शूरस्य राज्ञो दुहिता आजमीढकुलं गता॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
भगवान वसुदेव बोले - "बुआ! संसार में तुम्हारे समान सौभाग्यशाली और कौन है? तुम राजा शूरसेन की पुत्री हो और राजा अजमीढ़ के कुल में ब्याही गई हो।"
 
Lord Vasudev said - Aunt! Who else in the world is as fortunate as you? You are the daughter of King Shursen and have been married into the family of King Ajamidh.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)