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mahabharat 5.90.9-10h: केशव! बचपन से ही पाण्डवों को शंख और दुन्दुभियों की गम्भीर ध्वनि, मृदंग की मधुर ध्वनि और बाँसुरी की मधुर धुनों ने जगाया था। 9 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  5.90.9-10h 
शङ्खदुन्दुभिनिर्घोषैर्मृदङ्गैर्वेणुनिस्वनै:॥ ९॥
पाण्डवा: समबोध्यन्त बाल्यात् प्रभृति केशव।
 
 
अनुवाद
केशव! बचपन से ही पाण्डवों को शंख और दुन्दुभियों की गम्भीर ध्वनि, मृदंग की मधुर ध्वनि और बाँसुरी की मधुर धुनों ने जगाया था। 9 1/2॥
 
Keshav! Right from childhood, the Pandavas were awakened by the solemn sounds of conch shells and dundubhis, the sweet sounds of mridangas and the melodious tunes of flutes. 9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)