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mahabharat 5.90.88-89: पुरुषोत्तम! मधुसूदन! जिस कुन्ती के पुत्र श्रेष्ठ बलवान बलरामजी, महारथी प्रद्युम्न और आप हैं, तथा जिसके रक्षक हैं; युद्ध में पीठ न दिखाने वाले विजयी अर्जुन और भयंकर भीमसेन जैसे पुत्र जिनके जीवित हैं, वही मैं ऐसे दुःख भोग रहा हूँ॥ 88-89॥   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 88-89
 
 
श्लोक  5.90.88-89 
यस्या मम सपुत्रायास्त्वं नाथो मधुसूदन।
रामश्च बलिनां श्रेष्ठ: प्रद्युम्नश्च महारथ:॥ ८८॥
साहमेवंविधं दु:खं सहेऽद्य पुरुषोत्तम।
भीमे जीवति दुर्धर्षे विजये चापलायिनि॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
पुरुषोत्तम! मधुसूदन! जिस कुन्ती के पुत्र श्रेष्ठ बलवान बलरामजी, महारथी प्रद्युम्न और आप हैं, तथा जिसके रक्षक हैं; युद्ध में पीठ न दिखाने वाले विजयी अर्जुन और भयंकर भीमसेन जैसे पुत्र जिनके जीवित हैं, वही मैं ऐसे दुःख भोग रहा हूँ॥ 88-89॥
 
Purushottam! Madhusudan! The Kunti who has as her sons the best of the strong Balarama, the mighty warrior Pradyumna and you as her protectors; whose sons like the victorious Arjuna who never turns his back in a war and the fierce Bhimasena are alive, is the one I am suffering such miseries.'॥ 88-89॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)