Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.90.85-86: राज्य की हानि दुःख का कारण नहीं है। जुए में हार जाना भी दुःख का कारण नहीं है। मेरे पुत्र वन में चले गए, इससे भी मुझे दुःख नहीं होता; परन्तु मेरी परम सुन्दरी पत्नी को केवल एक वस्त्र पहनकर सभा में जाना पड़ा और दुष्टों के कटु वचन सुनने पड़े, इससे बढ़कर दुःख और क्या हो सकता है ?॥ 85-86॥ | mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न दु:खं राज्यहरणं न च द्यूते पराजय:।
प्रव्राजनं तु पुत्राणां न मे तद् दु:खकारणम्॥ ८५॥
यत् तु सा बृहती श्यामा एकवस्त्रा सभां गता।
अशृणोत् परुषा वाच: किं नु दु:खतरं तत:॥ ८६॥
अनुवाद
राज्य की हानि दुःख का कारण नहीं है। जुए में हार जाना भी दुःख का कारण नहीं है। मेरे पुत्र वन में चले गए, इससे भी मुझे दुःख नहीं होता; परन्तु मेरी परम सुन्दरी पत्नी को केवल एक वस्त्र पहनकर सभा में जाना पड़ा और दुष्टों के कटु वचन सुनने पड़े, इससे बढ़कर दुःख और क्या हो सकता है ?॥ 85-86॥
‘Losing the kingdom is not a cause of sorrow. Losing in gambling is also not a cause of sorrow. My sons were sent to the forest, even this does not cause me sorrow; but my most beautiful wife had to go to the assembly wearing only one garment and had to listen to harsh words of the wicked, what could be a greater sorrow than this?॥ 85-86॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥