Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.90.8-9h: पिताजी! बचपन में ही उन्हें पिता के प्यार से वंचित कर दिया गया। मैंने ही उन्हें पाला-पोसा। शेरों, बाघों और हाथियों से भरे उस विशाल जंगल में मेरे बेटे कैसे रहते? माता-पिता को देखे बिना वे उस विशाल जंगल में कैसे रहते?   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  5.90.8-9h 
ऊषुर्महावने तात सिंहव्याघ्रगजाकुले।
बाला विहीना: पित्रा ते मया सततलालिता:॥ ८॥
अपश्यन्तश्च पितरौ कथमूषुर्महावने।
 
 
अनुवाद
पिताजी! बचपन में ही उन्हें पिता के प्यार से वंचित कर दिया गया। मैंने ही उन्हें पाला-पोसा। शेरों, बाघों और हाथियों से भरे उस विशाल जंगल में मेरे बेटे कैसे रहते? माता-पिता को देखे बिना वे उस विशाल जंगल में कैसे रहते?
 
Father! They were deprived of their father's love in their childhood. I always brought them up. How would my sons have lived in that huge forest filled with lions, tigers and elephants? How would they have lived in that great forest without seeing their parents?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)