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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  5.90.79 
विक्रमाधिगता ह्यर्था: क्षत्रधर्मेण जीवत:।
मनो मनुष्यस्य सदा प्रीणन्ति पुरुषोत्तम॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
पुरुषोत्तम! क्षत्रिय जीवन जीने वाले पुरुष का मन वीरता से अर्जित धन से सदैव संतुष्ट रहता है।
 
Purushottam! The mind of a man who leads his life as a Kshatriya is always satisfied with the wealth he has earned through valour. 79.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)