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mahabharat 5.90.78: गोविन्द! तुम सदैव क्षत्रिय धर्म में लगे रहने वाले माद्रीनन्दन नकुल-सहदेव से भी कहो- ‘पुत्रो! प्राणों की बाजी लगाकर भी तुम वीरता से प्राप्त सुखों को ही स्वीकार करो ॥78॥   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  5.90.78 
माद्रीपुत्रौ च वक्तव्यौ क्षत्रधर्मरतौ सदा।
विक्रमेणार्जितान् भोगान् वृणीतं जीवितादपि॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
गोविन्द! तुम सदैव क्षत्रिय धर्म में लगे रहने वाले माद्रीनन्दन नकुल-सहदेव से भी कहो- ‘पुत्रो! प्राणों की बाजी लगाकर भी तुम वीरता से प्राप्त सुखों को ही स्वीकार करो ॥78॥
 
Govind! You should also say to Madrinandan Nakul-Sahdev, who are always engaged in the Kshatriya religion – 'Sons! Even at the risk of your life, you should only accept the pleasures obtained through bravery. 78॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)