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mahabharat 5.90.76-77: यदि ऐसा समय आने पर भी तुम युद्ध नहीं करोगे, तो वह व्यर्थ होगा । तुम इस संसार के प्रतिष्ठित पुरुष हो । यदि तुम कोई अत्यन्त जघन्य कर्म करोगे, तो उस जघन्य कर्म के कारण मैं तुम्हें सदा के लिए त्याग दूँगा । पुत्रो ! समय आने पर तुम्हें अपने प्राणों का भी त्याग करने के लिए तैयार रहना चाहिए । 76-77॥   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 76-77
 
 
श्लोक  5.90.76-77 
अस्मिंश्चेदागते काले मिथ्या चातिक्रमिष्यति।
लोकसम्भाविता: सन्त: सुनृशंसं करिष्यथ॥ ७६॥
नृशंसेन च वो युक्तांस्त्यजेयं शाश्वती: समा:।
काले हि समनुप्राप्ते त्यक्तव्यमपि जीवनम्॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
यदि ऐसा समय आने पर भी तुम युद्ध नहीं करोगे, तो वह व्यर्थ होगा । तुम इस संसार के प्रतिष्ठित पुरुष हो । यदि तुम कोई अत्यन्त जघन्य कर्म करोगे, तो उस जघन्य कर्म के कारण मैं तुम्हें सदा के लिए त्याग दूँगा । पुत्रो ! समय आने पर तुम्हें अपने प्राणों का भी त्याग करने के लिए तैयार रहना चाहिए । 76-77॥
 
If you do not fight even when such a time comes, it will be in vain. You are respected men of this world. If you commit any extremely heinous deed, I will abandon you forever because of that heinous deed. Sons! You should be ready to sacrifice even your life when the time comes. 76-77॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)