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mahabharat 5.90.75: हे भगवान कृष्ण! आप अर्जुन और युद्ध के लिए सदैव तत्पर रहने वाले भीमसेन से कहिए कि जिस उद्देश्य से एक क्षत्राणी पुत्र को जन्म देती है, उसे पूरा करने का समय आ गया है।   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  5.90.75 
अथो धनंजयं ब्रूया नित्योद्युक्तं वृकोदरम्।
यदर्थं क्षत्रिया सूते तस्य कालोऽयमागत:॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
हे भगवान कृष्ण! आप अर्जुन और युद्ध के लिए सदैव तत्पर रहने वाले भीमसेन से कहिए कि जिस उद्देश्य से एक क्षत्राणी पुत्र को जन्म देती है, उसे पूरा करने का समय आ गया है।
 
Lord Krishna! You tell Arjuna and Bhimasena, who is always ready for war, that the time has come to fulfil the purpose for which a Kshatrani gives birth to a son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)