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mahabharat 5.90.74: वासुदेव! जो स्त्री दूसरों पर निर्भर होकर जीवनयापन करती है, उसे धिक्कार है। दुःख उठाकर जीविका कमाने से मर जाना अच्छा है। 74.   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.90.74 
पराश्रया वासुदेव या जीवति धिगस्तु ताम्।
वृत्ते: कार्पण्यलब्धाया अप्रतिष्ठैव ज्यायसी॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
वासुदेव! जो स्त्री दूसरों पर निर्भर होकर जीवनयापन करती है, उसे धिक्कार है। दुःख उठाकर जीविका कमाने से मर जाना अच्छा है। 74.
 
Vasudev! Shame on the woman who lives by depending on others. It is better to die than to earn a living through misery. 74.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)