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mahabharat 5.90.73: माधव! तुम्हें धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर से कहना चाहिए - 'पुत्र! तुम्हारे धर्म की बड़ी हानि हो रही है। इसे व्यर्थ न गँवाओ।'   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  5.90.73 
ब्रूया माधव राजानं धर्मात्मानं युधिष्ठिरम्।
भूयांस्ते हीयते धर्मो मा पुत्रक वृथा कृथा:॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
माधव! तुम्हें धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर से कहना चाहिए - 'पुत्र! तुम्हारे धर्म की बड़ी हानि हो रही है। इसे व्यर्थ न गँवाओ।'
 
‘Madhava! You should tell the righteous king Yudhishthira - ‘Son! Your dharma is being greatly harmed. Do not waste it in vain.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)