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mahabharat 5.90.72: जनार्दन! जो लोग प्राणों का नाश होने पर लुप्त हो जाते हैं, उनके लिए लोग श्राद्ध करते हैं। यदि मृत्यु का अर्थ लुप्त होना है, तो मेरे लिए पाण्डव मर गए हैं और मैं भी उनके लिए मर गया हूँ॥ 72॥   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  5.90.72 
जीवनाशं प्रणष्टानां श्राद्धं कुर्वन्ति मानवा:।
अर्थतस्ते मम मृतास्तेषां चाहं जनार्दन॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
जनार्दन! जो लोग प्राणों का नाश होने पर लुप्त हो जाते हैं, उनके लिए लोग श्राद्ध करते हैं। यदि मृत्यु का अर्थ लुप्त होना है, तो मेरे लिए पाण्डव मर गए हैं और मैं भी उनके लिए मर गया हूँ॥ 72॥
 
‘Janardan! People perform Shraddha for those who disappear after their lives are destroyed. If death means disappearing, then for me the Pandavas are dead and I am also dead for them.॥ 72॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)