Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.90.67: मैं इस दिव्य वाणी को दोष नहीं देता, अपितु महाविष्णु रूप धर्म को प्रणाम करता हूँ। वे इस जगत के रचयिता हैं। धर्म सदैव समस्त लोकों का पालन करता है॥ 67॥ | mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं इस दिव्य वाणी को दोष नहीं देता, अपितु महाविष्णु रूप धर्म को प्रणाम करता हूँ। वे इस जगत के रचयिता हैं। धर्म सदैव समस्त लोकों का पालन करता है॥ 67॥
‘I do not blame this heavenly voice, but I bow to Dharma in the form of Maha Vishnu. He is the creator of this world. Dharma always sustains all the people.॥ 67॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥