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mahabharat 5.90.64: परंतु श्री कृष्ण! इस प्रकार मेरे पिता और ससुर ने भी मेरे साथ छल किया है। इससे मैं अत्यन्त दुःखी हूँ। मेरे जीवित रहने का क्या लाभ है?॥ 64॥   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  5.90.64 
साहं पित्रा च निकृता श्वशुरैश्च परंतप।
अत्यन्तदु:खिता कृष्ण किं जीवितफलं मम॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
परंतु श्री कृष्ण! इस प्रकार मेरे पिता और ससुर ने भी मेरे साथ छल किया है। इससे मैं अत्यन्त दुःखी हूँ। मेरे जीवित रहने का क्या लाभ है?॥ 64॥
 
But Shri Krishna! In this way my father and father-in-law have also treated me with deceit. I am very sad because of this. What is the use of my being alive?॥ 64॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)