Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.90.61-62h: श्री कृष्ण! मैंने पांडवों और धृतराष्ट्र के पुत्रों के प्रति कभी कोई भेदभाव नहीं किया। इस सत्य के प्रभाव से मैं अवश्य देखूँगा कि आगामी युद्ध में शत्रुओं का संहार करके आप पांडवों सहित संकट से मुक्त हो जाएँ और देवी लक्ष्मी ने आपको ही वरण किया हो। पांडवों में वे सभी गुण हैं जिनके कारण शत्रु उन्हें पराजित नहीं कर सकते। | mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न मे विशेषो जात्वासीद् धार्तराष्ट्रेषु पाण्डवै:।
तेन सत्येन कृष्ण त्वां हतामित्रं श्रिया वृतम्।
अस्माद् विमुक्तं संग्रामात् पश्येयं पाण्डवै: सह॥ ६१॥
नैव शक्या: पराजेतुं सर्वं ह्येषां तथाविधम्।
अनुवाद
श्री कृष्ण! मैंने पांडवों और धृतराष्ट्र के पुत्रों के प्रति कभी कोई भेदभाव नहीं किया। इस सत्य के प्रभाव से मैं अवश्य देखूँगा कि आगामी युद्ध में शत्रुओं का संहार करके आप पांडवों सहित संकट से मुक्त हो जाएँ और देवी लक्ष्मी ने आपको ही वरण किया हो। पांडवों में वे सभी गुण हैं जिनके कारण शत्रु उन्हें पराजित नहीं कर सकते।
Sri Krishna! I never had any discrimination against the Pandavas and the sons of Dhritarashtra. With the effect of this truth, I will definitely see that you along with the Pandavas are freed from trouble by killing the enemies in the coming war and the goddess Lakshmi has chosen you only. The Pandavas have all such qualities due to which the enemies cannot defeat them. 61 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥