Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.90.60: दुर्योधन ने छल और जुए के द्वारा मेरे पुत्रों को राज्य से वंचित कर दिया। चौदह वर्ष हो गए हैं जब से वे इस दयनीय स्थिति में हैं। यदि सुख भोगने का अर्थ पुण्य कर्मों के फल का नाश करना है, तो चूँकि हमने पाप के फलस्वरूप दुःख भोगा है, अतः अब हमें भी दुःख भोगकर सुख भोगना चाहिए॥60॥ | mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दुर्योधन ने छल और जुए के द्वारा मेरे पुत्रों को राज्य से वंचित कर दिया। चौदह वर्ष हो गए हैं जब से वे इस दयनीय स्थिति में हैं। यदि सुख भोगने का अर्थ पुण्य कर्मों के फल का नाश करना है, तो चूँकि हमने पाप के फलस्वरूप दुःख भोगा है, अतः अब हमें भी दुःख भोगकर सुख भोगना चाहिए॥60॥
‘Duryodhan deprived my sons of their kingdom through deceit and gambling. It has been fourteen years since they have been in this miserable condition. If enjoying happiness means the loss of the fruits of good deeds, then since we have suffered misery as a result of sin, we too must now enjoy happiness after suffering.॥ 60॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥