Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.90.6: मेरे पुत्रों ने हर्ष और क्रोध को जीत लिया था। वे ब्राह्मणों के हितैषी और सत्यवादी थे; तथापि (शत्रुओं के अन्याय से विवश होकर) वे प्रियजनों और सुखों से विमुख हो गए और मुझे रोता-बिलखता छोड़कर वन की ओर चले गए॥6॥ | mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मेरे पुत्रों ने हर्ष और क्रोध को जीत लिया था। वे ब्राह्मणों के हितैषी और सत्यवादी थे; तथापि (शत्रुओं के अन्याय से विवश होकर) वे प्रियजनों और सुखों से विमुख हो गए और मुझे रोता-बिलखता छोड़कर वन की ओर चले गए॥6॥
My sons had conquered joy and anger. They were well-wishers of brahmanas and truthful; however (forced by the injustice of the enemies) they turned away from loved ones and pleasures and left me weeping and wailing and went towards the forest.॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥