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mahabharat 5.90.57: धृतराष्ट्र के पुत्रों ने भरी सभा में कौरवों के सामने द्रौपदी का जो अपमान किया, जिससे किसी का भला नहीं हो सकता, वह मेरे हृदय को जलाता रहता है।   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  5.90.57 
तन्मां दहति यत् कृष्णा सभायां कुरुसंनिधौ।
धार्तराष्ट्रै: परिक्लिष्टा यथा न कुशलं तथा॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र के पुत्रों ने भरी सभा में कौरवों के सामने द्रौपदी का जो अपमान किया, जिससे किसी का भला नहीं हो सकता, वह मेरे हृदय को जलाता रहता है।
 
The insult which the sons of Dhritarashtra inflicted on Draupadi in the presence of the Kauravas in the court, which cannot bring good to anyone, continues to burn my heart.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)